तो में क्यां करु?

Date: 31st may, 2018 चांद हूँ में, कभी अमावस का, तो कभी पूर्णिमा का; पर, तुजे वो पू्र्णिमा का ही पसंद आए तो में क्यां करु? फुल हु में, कभी खीला-खीला, तो कभी मुर्जाया हुआ; पर, तुजे वो खीला हुआ हि पसंद आए, तो में क्यां करु? अरे, कुदरत हु में, कभी हस्ती-हसाती, बहारो से... Continue Reading →

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ચૂપ-ચાપ ઘણું બોલી જવાણુ,

Date: 20th april 2018 ચૂપ-ચાપ ઘણું બોલી જવાણુ, હવે જોશ-જોશથી ચૂપ રહેવાનું. ભીના વરસાદમાં કોરું રેહવાણું, હવે સુકે-સૂકુ પલળી જવાનું. એ હતી ત્યારે કાંઈ ના બોલાણું, હવે હરખે-હરખે રોવાનું. તું પણ આમ ચૂપ નો રહેતી, જે હોય તે મનમાં નો કહેતી. પ્રેમની ઋતુમાં દૂર નો ભાગતી, 'ને વિરહના વાદળની વાટે નો આવતી. - અભિજીત મહેતા

क्यां था मेरा देश और आज क्या बना दिया है?

Date: 10th March 2018 क्यां था मेरा देश और आज क्या बना दिया है? सोनेकी चिड़िया था मेरा देश, आज पिंजरेमें कैद मिडिया है। क्यां था मेरा देश और आज क्या बना दिया है? युवानो कि शहीदीसे बना था मेरा देश, आज युवांकी बली चढाइ जाती है। क्यां था मेरा देश और आज क्या बना... Continue Reading →

દિલમાં નહીં તારી દરેક રૂહ માં રહેવું છે મારે…

Date: 19th feb 2018 દિલમાં નહીં તારી દરેક રૂહ માં રહેવું છે મારે, યાદમાં નહીં દરેક પળ તારા છાયામાં રહેવું છે મારે. કેવી નિર્દોષતા છે આ સંબંધ માં, નથી બંધાતી તું કે નથી બંધાતો હું તારા રંગ માં. બહુ અલગ છીએ એકમેકથી આપણે, પણ એ રાત અને ચાંદ ની જોડી છીએ આપણે. નહીં પાડે જો... Continue Reading →

देश कि बात बाद में कर…

Date: 1st Feb 2018 देश की बात बाद में कर, पहेले घर महोल्ला और शहर साफ रख; वो टोप पहेने या साडी, तु अपनी नझर साफ रख। दुसरो की बाते बाद में कर, पहेले खुद के घर का ध्यान रख; उसके चरीत्र पे उंगली बाद में कर, पहेले खुद के चरीत्र का ख्याल रख। विश्व... Continue Reading →

Peace

Date: 19th January 2018 Cigarette smoking is injurious to health...! Everyone knows this, But no one is interested to stop the manufacturing, Because by stopping that many business houses lost their business??? Same way war and weapon can destroy the world, But no one is interested to stop weapon manufacturing, Because by doing that many superpower countries... Continue Reading →

खुद को ढुंढता हुं में..

Date: 17th December 2017 सुबह की पहली किरन में, दोपहर की चुबती धुप में; और उस खुशनुमा शाम में, खुद को ढुंढता हुं में । औंस की हर बुंद में, बहते पानी के झरणे में; और उस शांत समंदर में, खुद को ढुंढता हुं में । हिंदु की गीता में, इसलाम के कुरान में; और... Continue Reading →

उस दिन में बहोत खुश था, जब घर से निकल रहा था…

Date: 28th November 2017 उस दिन में बहोत खुश था जब घर से निकल रहा था, और खुश क्यों नहीं होता? बड़े दिनों बाद ससुराल जो जा रहा था। सुबह का वखत था, और पंखे फैलाये में आसमान में उड़ रहा था; शर्दी की ठंडी हवाएँ बदन को चिर रही थी। इन सारी बातो को... Continue Reading →

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