शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
हिंदुस्तानी कहते हे खुद को,
पर उसीकी बुराई करने में शर्म नहीं आती।

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
बाते करेंगे भाईचारे की,
पर कोमवाद के नाम पे उसी भाई को काटने में शर्म..

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
स्वच्छता अभियान में जडू लेके निकालेंगे,
पर बच्चो को हाईवे पर कचरा डलवाने में शर्म…

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
अम्बा और मधर को पूजेंगे,
पर लड़कियो को छेड़ते शर्म….

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
बाल मजदूरी के पोस्टर लगाते हे,
पर छोटू से चाय लेने में शर्म…..

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
बाते करते हे हम राम की,
पर भ्रस्टाचार करते वक्त शर्म …..

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
न्यूज़ देखके हम रोज गालिया देते हे नेताओ को,
पर वोट उन्ही को देते वक्त हमें शर्म…..

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती;
बुरा तो हम दुशाशन काभी बोलते हे,
पर घरमे पत्नी को मरते हमें शर्म……

शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती।
कितनी बार बोले शर्म नहीं आती।

                             -Abhijeet Mehta
                                                      

Advertisements

Author: અભિજીત મહેતા (Abhijeet Mehta)

Blogger | Thinker | Motivator | Engineer | Explorer | Traveller | Social Entrepreneur | Reader | Entrepreneur

1 thought on “शर्म नहीं आती हमें, शर्म नहीं आती”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s