समय

वख्त सबको मिलाता हे जिंदगी बदलने के लिए पर, जिंदगी दोबरा नहीं मिलाती वख्त बदलने के लिए।

समय न किसी ने देखा न किसी ने छुआ पर हम सब लोगो ने महसूस किया। समय जो सदियो से हो रही घटनाओ का साक्षी हे। समय जो कभी किसी के साथ होता हे तो कभी किसी के खिलाफ भी हो सकता हे। पर ये कहानी हे एक ऐसे व्यक्ति की जिसका न समय ख़राब था नहीं समय अच्छा पर उसका समय रुका हुआ था।

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अजीब लगता हे सुनने में पर सच यही हे। हर कोई अपने जीवन में ऎसे समय से गुजरा हुआ होता हे। ये कहानी हे गुजरात के एक छोटे से सिटी में रहते एक युवान की, जिसका नाम राजू था। राजू के पिता की उम्र तकरीबन साठ साल की थी घरमे बड़ा भाई था जिसकी शादी हो चुकी थी। उसके पिता शहर के प्रतिष्टित नागरिक थे।

वे कापड के होलसेल व्यापारी थे। आजसे कुछ साल पहले वो एक गंभीर बीमारी से गुजरे और उसके बाद उनका धंधा कम हो गया। तब भी उन्होंने अपने बड़े बेटे को मास्टर करवाया और शादी भी करवाई। थोड़े साल तो सबकुछ अच्छा चल रहा था तभी राजू की इंजीनियरिंग की पढाई आई और बड़े का आगे का अभ्यास आया। तब तो सबकुछ ठीक था इस लिए अभ्यास के लिए अनुमति देदी।

पर एक साल बाद समय पलट गया और कुछ कारन से उनका धंधा बंध हो गया। और तकलीफ शुरू हुई। आज के दिन राजू इंजीनियरिंग के छटवे सेमेस्टर में हे और उसका बड़ा भाई उच्च कक्षा की पढाई में हे। अभी राजू को पता चल गया हे की उसका साठ साल का बापू अब कुछ ज्यादा कम नहीं कर सकता और उसके भाई भी अभी कुछ नहीं कर सकते। राजू के पिता के पास संपति तो थी पर उनको बेचनी नहीं थी और धंधा चल तो रहा था पर ना के बराबर। अब राजू ऐसी दुविधा में था की डेढ़ साल तक ना वो कुछ कर सकता हे न वो सह सकता हे। अभी वो समय के ऎसे चक्रव्यूह में फस चूका हे जहा उसके पास धैर्य रखने के आलावा कोई उपाय नहीं हे।

अगर आपके पास कोई उपाय होतो कमेंट में बताना जरूर।

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